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(d) From Blessed are they that mourn, the stanza which explains why the good man's trust should not depart.

2. (a) Give in your own words a brief account of Nelson's experien. 5 ces while in command of one of the boats which were sent out to explore a passage into the open water during the voyage of discovery towards the North Pole.

(b) Reproduce the substance of De Quincey's account of the search 5 made for the missing Greens by the men of Grasmere.

3. (a) What does Carlyle mean by diligence, and what is its impor. 12 tance in student life? What does he say about the division of books into good books and bad books, and what according to him should be the aim of all our • studies and readings' in a University ?

(b) Why is a true gentleman more likely to be found in the cultiva. 12 ted grades of higher society ? Illustrate that it needs great moral cour. age to introduce a thing that is now in the face of high anthority. In what does the nobility of Ram and of Arjuna consist, and what practical lesson does their nobility teach us ?

4. (a) Tell briefly in your own words the story of Dinah Moore. How 18 did the reconciliation between Dinah and Martha come about?

(6) Explain briefly in your own words the moral of the poemThe voice of Spring.' What is the lesson which the Village Blacksmith teaches us ? 5. (a) Punctuate the following, passage, using capital letters and in

10 verted commas wbere necessary:

there is truce betwixt our nations he said in the lingua franca commonly used for the purpose of communication with the crusade8 wherefore should there be war betwixt thee and me let there be peace betwixt us i am well contented answered he of the couchant leopard but what security dost thod offer that thou wilt observe the truce the word of the follower of a prophet was never broken answered the emir it is thon brave nazarene from whom i should demand security did i not kuow that treason seldom dwells with conragé.

(8) Rewrite the following, converting it into the Indirect Form of Speech :

'It is justly spoken,' he said, 'list to a Frank, and hear a fable.' Thou art not courteous, misbeliever,' replied the Crusader, 'to doubt the word of a dubbed knight ; and were it not that thou speakest in ignorance, and not in malice, our trnce had its ending ere it is well begun. Thinkest thou I tell thee an untruth when I say that I, one of the five hundred horsemen, armed in complete mail, have ridden-ay, and ridden for miles-apon water as solid as the crystal, and ten times less brittle!' The Moslem answered, “What wouldst thou tell me pi

6. (a) What are the sources of the impurities of air ? What is 13 meant by ventilation, and wherein lies the necessity for it?

(6) Explain the nature and operation of the chief influences which affect the amount of food and drink taken by as.

(c) How can we account for the prevalence of malarial fever in Lower Bengal ? 7. Explain the following :

20 (a) Accustomod to consider his good sword as his safest escort and devont thoughts as his best companion.

(6) Fear! grandmamma, I never saw fear.
(c) The perceptions of infants are not excited by graduated steps.

(d) The force of will, thus exercised in the father, ay bave led to
a hea ling faith in the son.
(e) and grief may bide an evening guest,

Bat joy shall come with early light.

(f) In every clime the magnet of his soul,

Touched by remembrance, trembles to that pole.
(9) The river glideth at his own sweet will.
(h) And what seems but idle show

Strengthens and sopports the rest.
(1) Grieving, if aught inanimate ever grieves,

Over the unreturning brave.
(j) —When Youth avd Pleasure meet

To chase the glowing Hours with flying feet. 8. Parse all the words in 7 (i).

10

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Head Examiner-J. N. DAS-GOPTA, Esq., B.A. (Oxon.)

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13

আমি যখন রােমে ছিলাম, এক দিন সকালে আমি এমন একটা ভুল করিয়াছিলাম যে, শুনিলে হাসি পায়। এক জন লােক টুপি হাতে করিয়া রাস্তার যে ধারে ছায়া, সেই ধারে দাঁড়াইয়া ছিল। আমি যখন তাহার কাছ দিয়া যাই, সে যদিও কথা কহিল না, কিন্তু এমনি ভাবে দৃষ্টি নিক্ষেপ করিতে লাগিল যে, তাহাতে দয়া হয় । দুঃখের ছায়ায় তাহার মুখ মলিন হইয়াছিল ও তাহার কোটটীর

সৰ সূতা বাহির হইয়া পড়িয়াছিল। দেখিয়াই আমার মনে হইল, এ ব্যক্তি ভিক্ষুক, দারিদ্র্যের তাড়নে বিদেশী লােকের দান লইতে বাধ্য হইয়াছে, কিন্তু অভিমানে মুখ ফুটিয়া চাহিতে পারিতেছে না। আমি মনে মনে বলিলাম, “গরীব বেচারা, এক কালে তােমারও ভাল সময় ছিল”। এবং আমার অল্পস্বল্প যাহা দিবার সামর্থ্য ছিল, তাহার টুপিতে টুপ করিয়া ফেলিয়া দিলাম। কাঁকড়া বিছা দেখিলে লােকে যেমন করিয়া উঠে, মুদ্রা দেখিয়া সে তেমনি করিয়া উঠিল ।

এবং ধন্যবাদ দেওয়া দূরে থাকুক, তাহার মাতৃভাষায় যত দূর সম্ভব গালি বর্ষণ করিল। পরে

পরে মুদ্ৰাটী রাস্তার উপর ফেলিয়া দিয়া দুই হাতে আপনার ময়লা টুপিটী দুই কানের উপরে লাগাইয়া ধীরে ধীরে পা ফেলিয়া প্রাচীন কালের রােমানদের মত গর্বিত ভাবে চলিয়া গেল। এক মুদী আপন দোকানের দুয়ারে দাঁড়াইয়া কৌতুক দেখিতেছিল ও সময়ে সময়ে হাসিয়া গড়াইয়া পড়িতেছিল। আমি আস্তে আস্তে চলিয়া আসিলাম মনে মনে নিশ্চয় করিলাম, ভবিষ্যতে সাবধান হইতে হইবে। গ্রীষ্মকালের গরম দিনে, টুপি হাতে করিয়া, এক জন দরিদ্র ভদ্রলােক ছায়ায় দাঁড়াইয়া আছে দেখিলেই তাহাকে ভিক্ষুক বলিয়া আর ভুল যেন না হয়।

B.

13

তখন

বারাণসী নগরে ধূর্তক নামে এক জন চোর যখন এক জন বণিকের বাটীতে সিদ দিতেছিল, তখন সে ধরা পড়ে ও তাহার প্রাণদণ্ডের আজ্ঞা হয়। তাহাকে যখন বধ্যভূমিতে লইয়া যাওয়া হইল,

সে রাজকর্মচারীকে বলিল, “আমি তােমার প্রভুকে একটী অতি প্রয়ােজনীয় গুপ্ত কথা বলিতে চাই”। রাজসভায় আনীত হইলে, রাজা তাহাকে জিজ্ঞাসা করিলেন, “তােমার গুপ্ত কথা কি?” সে কহিল “মহারাজ আমি বীজ পুতিয়া তাহা হইতে সােণার ফুল উৎপন্ন করিতে পারি”। শুনিয়া রাজার ধনলােভ বৰ্ধিত হইল। এবং তিনি উহার দণ্ডাজ্ঞা তিন মাসের জষ্ঠ বন্ধ রাখিলেন। ঐ লােকটী অন্যান্য দ্রব্যের সহিত স্বর্ণরেণু মিশ্রিত করিয়া বীজাকারে ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র গােলক প্রস্তুত করিল, এবং নির্জন দেখিয়া এক খণ্ড জমী খড়িয়া রাখিল। এই সকল হইয়া গেলে সে রাজাকে বলিল, “মহারাজ সব প্রস্তুত। বীজটী পুতিতে হইলে এমন এক জন লােক চাই, যে কখন চুরি করে নাই। অতএব মহারাজ আপনি একটু নূন স্বীকার করিয়া বীজটা পুতিয়া

দিউন”। রাজা ইতস্ততঃ করিয়া উত্তর দিলেন, “আমি যখন বালক, আমি সময়ে সময়ে খেলুড়ীদের

দিবার জন্য

বাবার

বাকস হইতে টাকাকড়ী লইতাম । আমার মন্ত্রীদের মধ্যে এক ধন. বীজ বপন করিবে”। কিন্তু মন্ত্রীদের মধ্যেও কেহ আপনাকে সম্পূর্ণ নির্দোষ বলিয়া মনে করিতে পারিলেন না। ঐ দুষ্টবুদ্ধি ধূর্ত লােক তখন বলিল, “আচ্ছা যদি আমরা সকলেই চোর, তবে আমি একাই মারা যাই কেন?” তখন রাজা হাসিয়া উঠিলেন, ও বলিলেন, “আমি দেখিতেছি তুমি খুব কৌতুক করিতে পার, তুমি সর্বদা আমার কাছে থাকিবে এবং যখনই আমার মন খারাপ হইবে আমাকে হাসাইবে ।

HINDI.

The figures in the margin indicate full marks.

A.

Translate into English :

13

मैंने एक दिन भोर को जब में रोम में था एक बड़ी हंसी की मूल की। एक आदमी हाथ में अपनी टोपी लिये गलौ को उस ओर खड़ा था जिधर छांह थी। जैसे में उस के पास से चला उसने मेरी ओर एक करुणाभरी दृष्टि से देखा, यद्यपि वह मुंह से कुछ न बोला। उसके मुंह पर ऐसी दीनता दिखाई देती थी और उसका अङ्गवस्त्र ऐसा जर्जर था कि में तुरत जान गया कि वह उन भिक्षुकों में से है जिनको दारिद्रन अपरिचित व्यक्ति का दान ग्रहण करने में अवश कर देता है यद्यपि प्रात्माभिमान उसे मांगने नहीं देता। "अहो दोन पुरुष! तुमने निःसन्देह अच्छे दिन देखे हैं, मैंने अपने मन में कहा, और यत्किञ्जित् जो में दे सकता था उसकी टोपी में डाल दिया। उसने उस द्रव्य को इस प्रकार देखा मानों कोई बिच्छू हो और मुझे धन्यवाद देने के बदले अपनी बोली के सब धिक्कारसूचक शब्दों को मुझपर बोछार की। इसके उपरान्त उसने उस सिक्के को सड़क पर फेंक अपने दोनों हाथों से अपनी मेली ठोपी को सिर पर तान लिया और वह एक प्राचीन रोम निवासी की भांति मदर्प ऐठता

चलता बना जिससे एक पसारी के लिये जो अपनी दुकान

दूकान के हार पर खड़ा हंसी से फठा जाता था बड़ाही कोतुक हुमा । उसने मुझे तमा मांगने का समय न दिया पर जैसे में वहां से चला मैंने भविष्य में सावधान होने और प्रत्येक निर्धन कुलीन व्यक्ति को जो गर्मी के किसी दन अपने हाथ में ठोपी लिये छाया में खड़ा हो मूल से भी भिक्षक न समझने का अपने मन में निश्चय कर लिया ।

B.

13

बनारस को नगरी में धूर्तक नामौ एक चोर किसी घनौ सेठ के घर में घुसते हुए पकड़ा गया और उसके लिये प्राणदण्ड को प्राज्ञा हुई। जब वह वधस्थान में पहुंचा उसने राजपुरुषों से कहा, “मरने के पूर्व मेरी इच्छा है कि मैं तुम्हारे स्वामी से एक भारी गुप्त बात कह हूँ"। राजसभा में लाये जाने पर राजा ने उससे पूछा वह कोनसी तुम्हारौ गुप्त बात है। उसने उत्तर दिया, “प्रभो, में बौज से सोने के फूल उपजाने की विधि जानता हूँ"। राजा ने, जिसको लोभ वृत्ति इस प्रकार उत्तेजित की गई थी दण्ड होने में तीन महीने का अवकाश दिया । उस मनुष्य ने सोने को धूल के साथ और और पदार्थ मिलाके पोर उन को बीज को सौ छोठोर गोलियां बनाके एक निर्जन स्थान में एक गढ़हा खोदा। ऐसा करके उसने राजा से निवेदन किया "प्रभो सब कुछ प्रस्तुत है। अब यह बीज ऐसे आदमौ को बोना चाहिये जिसने कभी कुछ न चुराया हो । प्रापही श्रीमान इसके वोनेवाले का काम करें"। राजाने अग्र पश्चात् करते २ उत्तर दिया कि जब में बालक था में कभी अपने पिता को रुपयों की पेटी से अपने खेल के साथियों को देने के लिये रुपये पैसे ले लिया करता था। मेरे मन्तियों में से कोई इन बीजों को बोएगा। परन्तु किसी मन्त्री ने अपने को सर्वथा निर्दोष न देखा । इस पर उस धूर्त ने कहा “तो जब हम लोगों में से सबही चोर हैं तो मेंहों कोवल क्यों मारा जाने को हूँ?" इस पर राजा हंसे और बोले “में देखता हूँ कि तुम बड़े विनोदी पुरुष हो, तुमको सदा मेरे निकट रहना होगा और जब कभी में उदास रहूं मुझे हंसाना होगा।"

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